शीतल पी सिंह
भाखड़ा नांगल बांध की दीवारों के झुकने की खबरें सोशल मीडिया पर पिछले कुछ समय से खूब फैल रही हैं। खासकर पंजाबी भाषा की टिप्पणियों और पोस्ट्स में यह दावा किया जा रहा है कि बाँध की दीवार टेढ़ी हो गई है, खतरा बढ़ गया है और जल्दी ही कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है। ये खबरें लोगों में चिंता पैदा कर रही हैं। लेकिन सच्चाई समझना जरूरी है ताकि अफवाहों से बचा जा सके।
भाखड़ा बाँध हिमाचल प्रदेश और पंजाब की सीमा पर सतलुज नदी पर बना है। यह करीब तिरसठ साल पुराना कंक्रीट का बड़ा बाँध है। इसे आधुनिक भारत का मंदिर भी कहा जाता था। यह बाँध सिंचाई, बिजली उत्पादन और बाढ़ नियंत्रण के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के कई इलाके इससे पानी लेते हैं। बाँध की दीवार में हल्का झुकाव या डिफ्लेक्शन होना इंजीनियरिंग की सामान्य बात है। पानी का दबाव पड़ने पर दीवार थोड़ी बाहर की ओर मुड़ती है। डिज़ाइन में इसकी अनुमति दी गई है। सामान्य स्थिति में यह झुकाव एक दशमलव शून्य तीन इंच तक ठीक माना जाता है। भूकंप जैसी स्थिति में थोड़ा और ज्यादा झुकाव भी सहन किया जा सकता है।
पिछले साल नवंबर में जब जलाशय में पानी का स्तर ऊंचा था तब दीवार का झुकाव एक दशमलव एक सात इंच या कुछ रिपोर्टों में इससे थोड़ा ज्यादा दर्ज हुआ। यह सीमा से थोड़ा ऊपर था। पानी का स्तर कम होने पर यह झुकाव खुद कम हो जाता है। जून तक यह आंकड़ा फिर से सुरक्षित सीमा के अंदर आ गया था। भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड यानी बीबीएमबी के अधिकारियों ने साफ कहा है कि बाँध पर कोई तत्काल खतरा नहीं है। चेयरमैन ने भी दोहराया है कि स्थिति चिंता का विषय है लेकिन खतरा नहीं है। यह सिर्फ लंबी अवधि की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सावधानी का कदम है।
झुकाव का मुख्य कारण पिछले कई सालों से जलाशय का पानी न्यूनतम स्तर तक न उतरना है। गोबिंद सागर झील में पानी लगातार ऊँचा बना रहा। इससे दीवार पर लगातार दबाव बना रहता है। इसके अलावा नदी से आने वाली मिट्टी और रेत यानी गाद भी जलाशय में जमा हो रही है। इससे जलाशय की भंडारण क्षमता कुछ कम हुई है। लेकिन अधिकारियों के अनुसार गाद दीवार पर सीधे दबाव नहीं डालती क्योंकि वह बाँध से काफी दूर जमा होती है। बाँध की नियमित निगरानी होती रहती है। पहले भी कुछ सालों में झुकाव सीमा पार हुआ था लेकिन कोई समस्या नहीं आई।
बीबीएमबी ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। उन्होंने आईआईटी रुड़की को विस्तृत अध्ययन सौंपा है। इसमें विदेशी विशेषज्ञ भी शामिल किए गए हैं। रिपोर्ट आने में कुछ महीने लग सकते हैं। फरवरी में विशेषज्ञों के एक स्वतंत्र पैनल ने भी बाँध का निरीक्षण किया और उसे अच्छी हालत में पाया। बांध सुरक्षित है और रखरखाव ठीक चल रहा है। सोशल मीडिया पर समस्या इसलिए बढ़ती है क्योंकि लोग आधा-अधूरा या पुराना वीडियो और फोटो डालकर व्यूज बटोरने के लिए डर फैलाते हैं। कई पोस्ट्स में बाँध टूटने या बाढ़ आने की बात कही जा रही है जबकि आधिकारिक जानकारी कुछ और कहती है। पंजाब के लोगों के लिए यह बाँध बहुत मायने रखता है इसलिए चिंता स्वाभाविक है ।
बांध की उम्र बढ़ रही है इसलिए निरंतर देखभाल जरूरी है। पानी के स्तर को सही तरीके से नियंत्रित करना और जरूरत पड़ने पर गाद निकालने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं। फिलहाल घबराने की कोई बात नहीं है। बाँध अपनी जगह सुरक्षित खड़ा है और लोगों की सेवा कर रहा है।
लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।
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